वैसे तो , भारत में बहुत सरे पर्व मनाये जाते है , लेकिन हिन्दू पर्व में कुछ पर्व का काफी ही महत्व है। कुछ पर्व तोई ऐसे है जिसे मनाने के लिए लोग काफी उत्सुक रहते है , जैसे हिन्दुओं का महापर्व होली, रक्षाबंधन , दिवाली , छठ पर्व। ये तीन पर्व ऐसे है जो हर एक हिन्दू बहुत ही अच्छे से मनाता है । साल के शुरुआत में होली पर्व मार्च महीने में आता है जिस पर्व को नए साल में लोग इंतजार करते है। भारत के कई राज्यों में यह पर्व अलग अलग तरीके से मनाते है ।
भारतीय समाज द्वारा मनाए जाने वाला प्रमुख होली
हमारे प्यारे भारत की पहचान सिर्फ हमारे संसाधनों से नहीं अपितु हमारी भारतीय संस्कृति के त्योहार से भी हैं। हमारा भारत विभिन्न संस्कृति व उत्सवो का मेल है। और यह हमारी सबसे बड़ी विशेषता है। यहां पर मनाए जाने वाले त्योहार मानवीय सद्भावना व एकता को बढ़ाते हैं। होली भारत का प्रमुख त्योहार है। होली फाल्गुन माह की पूर्णिमा को मनाई जाती है। इस त्यौहार की प्रतीक्षा लोग बड़े ही हर्ष व उत्सुकता के साथ करते हैं।
भारतीय संस्कृति की पहचान है होली
भारत में होली की विभिन्न-विभिन्न क्षेत्रों में अलग-अलग मान्यताएं हैं।
उत्तर पूर्व भारत में भगवान श्री कृष्ण द्वारा राक्षसी पूतना के वध दिवस को होलिका दहन (पूतना दहन के रूप में) मनाई जाती है। वहीं, दक्षिण भारत में लोग मानते हैं कि इस दिन महादेव ने अपनी तीसरी आंख खोलकर कामदेव को भस्म कर दिया था। तथा उसकी राख को अपने शरीर पर लगाकर नृत्य किया था। यह सब कामदेव की पत्नी रति को बहुत दुख पहुंचाता है। और वह महादेव से अपने पति को पुनर्जीवित करने की प्रार्थना करती है। महादेव रति के दुख को देख कामदेव को पुनर्जीवित कर देते हैं। जिससे प्रसन्न होकर देवता महादेव के ऊपर रंगों की वर्षा करते हैं
इन मान्यताओं के साथ एक प्रसिद्ध पौराणिक कथा:
प्राचीन समय में एक अत्याचारी राक्षस जिसका नाम हिरण्यकश्यप था। उसने घोर तपस्या कर भगवान ब्रह्मा से वरदान पाया कि संसार का कोई भी व्यक्ति,जीव- जंतु,देवी देवता या राक्षस उसे ना मार सके। वह ना ही बाहर मर सके ना ही घर में। वह ना ही रात को मर सके और ना ही दिन में,ना ही पृथ्वी पर ना ही पाताल में उसे कोई मार सके। ब्रह्मा जी ने उसे यह वरदान दे दिया। इस वरदान को पाकर हिरण्यकश्यप राक्षस और अधिक अहंकारी हो गया और अपने नगर में सभी के सामने यह ऐलान करा दिया कि अब से सभी लोग सिर्फ उसी की पूजा करेंगे और सभी लोग डर के कारण उसकी बात मान लेते हैं। बस उसके पुत्र प्रहलाद को छोड़कर। प्रहलाद भगवान विष्णु का परम भक्त था। तथा भगवान विष्णु की भी उस पर सदैव की कृपया रहती थी। हिरण्यकश्यप यह देखकर बहुत क्रोधित रहता था कि उसका पुत्र उसकी पूजा ना करके किसी और अन्य की पूजा करता है और इसी कारण उसने अपने ही पुत्र को मरवाने के लिए अपनी बहन होलिका की सहायता ली। होलिका को भी एक आग युक्त चादर का वरदान प्राप्त था। जिसमें वह आग में अगर उस चादर को ओढ़ कर बैठ जाए तो उसे कोई क्षति नहीं होगी।वह दोनों योजना बनाते हैं कि होलिका अपनी चादर ओढ़ प्रहलाद को गोद में बिठाकर चिता में बैठ जाएगी। “परंतु जिसकी रक्षा स्वयं भगवान करते हैं उसका कोई बाल भी बांका नहीं कर सकता“। यही हुआ होलिका के साथ,तेज हवाओं के कारण होलिका पर ओढ़ी हुई चादर प्रहलाद के ऊपर आ जाती है प्रह्लाद बच जाते हैं। होलिका भस्म हो जाती है। इस तरह बुराई पर अच्छाई की विजय पर हम इस दिन को होलिका दहन के रूप में मनाते हैं। होलिका दहन होली से एक रात पहले मनाई जाती है जिसमें सभी लोग एक एक लकड़ी लेकर सब को इकट्ठा कर खुली जगह पर जलाते हैं तथा प्रार्थना करते हैं कि बुराई का अंत हो।
होली से जुड़े कुछ रोचक तथ्य:
★होली के दिन लोग एक दूसरे को गुलाल या अबीर लगाकर उन्हें गले लगाकर होली की शुभकामनाएं देते हैं
★इस दिन बच्चे रंगो,गुब्बारों तथा पिचकारी के साथ होली खेलना पसंद करते हैं
★इस दिन घर में पकवान और गुजिया मुख्यतः रूप में बनाई जाती है वह अपने आस-पड़ोस में आपस में बांटते हैं।
★इस दिन फाल्गुन और धार्मिक गीत गाए जाते हैं।
★कई लोग इस दिन टोली बनाकर निकलते हैं
सामाजिक जिम्मेदारियां:
-हालांकि यह त्योहार मेल मिलाप खुशियों का त्योहार है। परंतु कुछ ऐसे वाक्य भी है इस त्यौहार में जो कि सामाजिक कल्याण के विरुद्ध है।
-इस त्योहार पर हमें महिलाओं के प्रति अत्यधिक संवेदनशील होने की जरूरत है क्योंकि इस दिन कई असामाजिक लोग महिलाओं के साथ दुर्व्यवहार करने का मौका ढूंढते हैं।
-इस दिन बच्चे अपने मनोरंजन के लिए कभी-कभी बड़े भी सड़क पर चल रहे वाहन कर्ता करता पर गुब्बारे फेंक कर मारते है जिससे उस वाहन कर्ता का संतुलन बिगड़ जाता है और वह दुर्घटना का शिकार हो जाता है।
हमें सदा ही यह बात याद रखनी चाहिए कि यह त्योहार रंगों तथा खुशियों का त्योहार है। और हमें इस दिन सिर्फ खुशियों का संचार करना चाहिए ना कि कोई भी और सामाजिक गतिविधि।